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जाने: पश्चिम बंगाल के हावड़ा ब्रिज का अनसुना इतिहास, जिसके सीने मे आज भी ज़िन्दा है जापान की बमबारी के ज़ख़्म

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नई दिल्ली :- पश्चिम बंगाल का हावड़ा ब्रिज बनाने में टाटा कंपनी ने भी अपना योगदान दिया था. ब्रिज को बनाया जरूर अंग्रेजों ने था, लेकिन भारतीयों का इस ब्रिज से गहरा कनेक्शन है. साल 1936 में इस ब्रिज को बनाने का काम शुरू हुआ था. Howrah Bridge का जब निर्माण किया गया था. ये तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था. दो पिलर्स पर टिका यह पुल कई मायनों में खास है. चलिए जानते है हावड़ा ब्रिज की सभी खास बातें….

Howrah Bridge की खास बात

इस ब्रिज को इस तरह से बनाया गया है कि यह पूरा ब्रिज सिर्फ दो पिलर्स पर टिका है. करीब 1500 फीट लंबे इस ब्रिज की खास बात यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. इसे बनाने में धातु की कीलों यानि रिवेट्स का इस्तेमाल किया गया है.

जापानी सेना ने की थी पुल तोड़ने की कोशिश

3 फरवरी 1943 को यानी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पुल पर जापानियों ने हमला किया था. दरअसल, जापानी सेना पुल तोड़कर आवाजाही को रोकना चाहती थी. जापानी सेना ने उस पर भारी बमबारी की. पुल इतना मजबूत था कि पुल को कोई नुकसान नहीं हुआ.

टाटा कंपनी ने की थी लोहे की आपूर्ति 

ब्रिज को बनाने की Responsibility ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेप Construction कंपनी को दी गई थी. Tata Steel ने इस ब्रिज में 85 % स्टील की आपूर्ति की थी. आपको बता दें कि इस ब्रिज को बनाने में कुल 26 हजार 500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था. हुगली नदी पर बना यह ब्रिज कोलकाता और हावड़ा को आपस में जोड़ता है. अंग्रेजों ने 1874 में 22 लाख रुपये की लागत से एक पंटून पुल का निर्माण किया

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