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Dara Singh: 500 से ज्यादा मुकाबले लड़े पर एक भी मैच नहीं हारे, रामायण में हनुमान बनकर मिली पहचान

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नई दिल्ली, Dara Singh:– आज दारासिंह की 10वीं पुण्यतिथि है. दारासिंह ने 500 से ज्यादा रेसलिंग मैच खेले और अपने जीवन में एक भी मैच नहीं हारा. उन्होंने 1952 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. वह राज्यसभा में चुने जाने वाले पहले स्पोर्ट्समैन रहे हैं. उन्होंने 10 बार वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप जीती है. तो चलिए आज द ग्रेट दारा सिंह के जीवन के दिलचस्प पहलुओं के बारे में जानते हैं.

ब्रिटिश राज में हुआ जन्म

दारा सिंह का जन्म 19 जुलाई 1928 को एक जाट फैमिली में हुआ था. उनके पिता सूरत सिंह रंधावा और मां बलवंत कौर पंजाब में रहते थे. दारा सिंह का जब जन्म हुआ था उस समय भारत में ब्रिटिश शासन लागू था. इन्हीं सब के बीच दारा पले बढ़े. दारा सिंह के करियर की शुरुआत सिंगापुर से हुई है. वो 19 साल की उम्र में ही सिंगापुर चले गए थे. वो वहां ड्रम मैन्युफैक्चरिंग मिल में काम करने लगे थे. यहीं से उन्होंने ग्रेट वर्ल्ड स्टेडियम के कोच हरनाम सिंह को गुरु मानकर रेसलिंग की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दी थी. कद-काठी में अच्छे होने के कारण उन्हें उनके गुरु ने पहलवानी करने के लिए बढ़ावा दिया. दारा ने भी गुरु की बात मानकर पहलवानी की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी.

कई पहलवानों को चटाई धूल

कुछ साल चली ट्रेनिंग के बाद रेसलर दारा सिंह ने प्रोफेशनल रेसलिंग शुरू कर दी. सन् 1959 में वो सबसे पहले ‘कॉमनवेल्थ चैंपियन’ बने.इसके बाद उन्होंने ‘बिल वर्ना’, ‘फ़िरपो जबिस्जको’, ‘जॉन दा सिल्वा’, ‘रिकिडोजन’, ‘डैनी लिंच’ और ‘स्की हाय ली’ जैसे धाकड़ पहलवानों को धूल चटाकर दुनिया भर में भारतीय पहलवानी का डंका बजाया.

60 से 80 के दशक में दुनिया के हर बड़े रेसलर को हराया

60 से 80 के दशक में दारा सिंह ने दुनिया के हर बड़े रेसलर को हराया था. इन्हीं में से एक दुनिया के सबसे खतरनाक रेसलर किंग कॉन्ग भी थे ‘दारा सिंह’ और ‘किंग कॉन्ग’ के बीच हुए एक महामुकाबले को लोग आज भी याद करते हैं. इस मैच में 130 किलो के दारा सिंह ने लगभग 200 किग्रा के ऑस्ट्रेलियाई ‘किंग कॉन्ग’ को उठाकर रिंग के बाहर फेंक दिया था. आज भी इसे रेसलिंग इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जाता है.

रुस्तम-ए-हिंद और रुस्तम-ए-पंजाब का खिताब जीता

1954 में हुए रुस्तम-ए-हिंद मुकाबले में दारा सिंह ने टाइगर जोगिंदर सिंह को हराया था. इस मुकाबले को जीतने पर महाराजा हरि सिंह ने दारा सिंह को सिल्वर कप दिया था. वहीं 1959 में उन्होंने कॉमलवेल्थ गेम और 1969 में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीता था साथ ही वो 10 बार वर्ल्ड चैंपियन रहे हैं.

हनुमान के रोल ने दिलाई पहचान

दारा सिंह को आम लोगों के बीच पहचान तब मिली जब उन्होंने 1980 में रामानंद सागर के सीरियल रामायण में हनुमान का रोल निभाया . इसके अलावा 1976 में आई फिल्म बजरंगबली में भी उन्होंने हनुमान का रोल प्ले किया था. इस सीरियल के बाद वे कई माइथोलॉजिकल फिल्मों में नजर आए.

500 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

दारा सिंह ने लगभग 500 फिल्मों में काम किया है. बॉलीवुड के अलावा दारासिंह ने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया. इसके अलावा उन्होंने फिल्में डायरेक्ट और प्रोड्यूस भी की हैं. दारा सिंह ऐसे पहले खिलाड़ी हैं जिन्हें राज्यसभा में सांसद के पद पर चुना गया है. 1998 में उन्होंने बीजेपी पार्टी ज्वाइन की थी. इसके बाद 2003 में उन्हें राज्यसभा सांसद के पद पर चुना गया. 2003 से 2009 तक दारा सिंह राज्यसभा सांसद रहे हैं.

ब्रेन डैमेज का पता चलते ही हॉस्पिटल छोड़ घर आए

दारा सिंह को 7 जुलाई 2012 को हार्ट अटैक आने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था. एडमिट होने के दो दिन बाद इलाज के दौरान दारा को पता चला कि उन्हें ब्रैन डैमेज हो गया है. ये पता चलते ही दारा सिंह 11 जुलाई को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो गए. उनका कहना था कि “लंबी उम्र के लिए कुछ नहीं किया जा सकता”. इसके अगले ही दिन 12 जुलाई 2012 को दारा सिंह की मौत हो गई थी. उनका अंतिम संस्कार मुंबई के जुहू में किया गया था.

 

Author Romiyo

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रोमियो परमार है. मैं खबरी एक्सप्रेस पर 2022 से बतौर कंटेंट राइटर का काम कर रही हूँ. मैंने बी.ए, एम.ए तक पढ़ाई की है. मैं सभी पाठकों तक लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई खबरें पहुंचाती हूँ. आप तक हर खबर सही और सबसे पहले पहुंचे यही मेरा सर्वोत्तम उद्देशय है. मैं अपनी पूरी लगन और मेहनत से आप तक हर खबर पहुंचने में तत्पर हूँ.

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