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Dussehra 2022 : दशहरे पर रावण जलाने से पहले जानिए इससे जुड़ी 10 दिलचस्प बातें

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नई दिल्ली :- दशहरा (Dussehra) या विजयदशमी का त्योहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. यह पर्व वीरता का उपासक है, भारतीय संस्कृति की वीरता की पूजा है. अश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला दशहरा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है. इस दिन देश के कोने-कोने में बुराई के प्रतीक माने जाने वाले रावण को जलाने की परंपरा चल रही है,  परंतु क्या आप जानते है रावण पात्र से जुड़े रोचक तथ्य? क्या आप जानते हैं रावण को दशानन क्यों कहा जाता है? क्या आप जानते हैं कि तमाम बुराइयों के बाद भी लंकापति रावण में कई ऐसे गुण थे, जो लोगों को अच्छी बातें सिखाता है. आइए जानते हैं रावण से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में विस्तार से.

जानें रावण से जुड़ें 10 रोचक तथ्य

  1. रावण भगवान शिव का प्रबल भक्त था, जिसने महादेव को प्रसन्न करने के लिए अपना सिर 10 बार काटा था, लेकिन हर बार भगवान शिव की कृपा से उसका सिर पीछे से जुड़ गया. तभी से वह दशानन कहलाने लगे.
  2. रावण को तंत्र-मंत्र और ज्योतिष का बहुत अच्छा ज्ञान था. रावण द्वारा लिखित रावण संहिता ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है.
  3. रावण के दस सिर भी उसकी माया से जुड़े हुए हैं, ऐसा माना जाता है कि उसके पास 9 रत्नों की एक माला थी, जिससे लोगों को 10 सिर होने का भ्रम हो जाता था. हालांकि रावण के दस सिर दस बुराइयों, काम, क्रोध, लोभ, मोह, वस्तु, ईर्ष्या, वासना, भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अहंकार का प्रतीक माने जाते हैं.
  4. रावण ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगते हुए कहा था कि उनकी मृत्यु एक आदमी और एक बंदर के अलावा किसी और से संभव नहीं हो सकती, क्योंकि वह उन दोनों का तिरस्कार करता था और अपनी शक्तियों पर बहुत गर्व करता था.
  5. रावण को संगीत का बहुत शौक था. ऐसा माना जाता है कि जब रावण वीणा बजाता था तो देवता भी उसकी बात सुनने धरती पर आते थे.
  6. ऐसा माना जाता है कि स्वर्ण लंका का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था, जिस पर रावण से पहले कुबेर का शासन था, लेकिन रावण ने अपने भाई कुबेर से बलपूर्वक लंकापुरी छीन ली.
  7. रावण में तमाम बुराइयों के बाद भी कई खास गुण थे, जैसे रावण अपना सारा काम पूरी लगन, लगन और मेहनत से करता है. उन्होंने अपने जीवन में कई बार कठोर तपस्या की.
  8. ऐसा माना जाता है कि जब वह पूरी दुनिया पर विजय की कामना के लिए निकला था, तो उसने यमदेव से भी युद्ध किया था. ऐसे में जैसे ही यमराज ने रावण का प्राण लेना चाहा, ब्रह्मा जी ने यमदेव को ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि उनकी मृत्यु किसी भी देवता के हाथों संभव नहीं थी.
  9. ऐसा माना जाता है कि जब रावण से युद्ध करते हुए एक समय ऐसा आया जब भगवान श्री राम रावण के भ्रम से निराश हो रहे थे, तब अगस्त्य मुनि ने उन्हें याद दिलाया कि आप ही सूर्यवंशी हैं, जिनकी साधना से विजय प्राप्त होती है. फिर भगवान सूर्य का ध्यान करने के बाद उन्होंने रावण की नाभि में बाण मारकर वध किया.
  10. ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्री राम द्वारा मारे गए बाण के बाद रावण अपनी अंतिम सांस ले रहा था, तब भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण को उनसे सीखने के लिए भेजा था. तब रावण ने मरते समय लक्ष्मण से कहा कि जीवन में कोई भी शुभ कार्य जल्द से जल्द कर लेना चाहिए, बिना भूले देर नहीं करनी चाहिए.

Rajat Sisodia

Rajat Sisodia is a journalist who expertise in writing digital news on Entertainment or Daily News Coverage Category. Rajat Sisodia have 7+ years of experience as a news article writer.

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