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अबकी बार बढ़ सकते हैं कपास के दाम, मार्केट में आसानी से नहीं मिल रही देसी कपास

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जींद:- पिछले खरीफ सीजन में गुलाबी सुंडी कपास फसल ने काफी कहर ढाया था, जिस वजह से इसके उत्पादन में भी काफी कमी आई थी. जिसके चलते अबकी बार भी इस कपास का रकबा घट सकता है. पानी की पर्याप्त उपलब्धता ना होने की वजह से जहां एक और किसान धान की फसल नहीं उगा सकते, वही कपास के रकबे में भी कमी आ रही है.

धीरे-धीरे घट रहा है कपास का रकबा 

पिछले साल जींद जिले में करीब 65000 हेक्टर में कपास की फसल थी. अबकी बार इसमें 10 से 15% तक कपास का रकबा घट सकता है. प्रदेश सरकार भूमिगत जल का दोहन रोकने के लिए कम  सिंचाई वाली फसलों पर जोर दे रही है. यदि किसान धान की जगह कपास की फसल उगाते हैं, तो उन्हें प्रति एकड़ 7000 रूपये प्रोत्साहन राशि भी सरकार की तरफ से दी जाती है. कपास की फसल में हजारों रुपये के महंगे कीटनाशक स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है, इन सब के बावजूद भी गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण ना हो पाने की वजह से अबकी बार किसान कपास की फसल की बिजाई से पीछे हट रहे हैं.

इसी वजह से अब किसान देसी कपास की बिजाई को ज्यादा महत्व दे रही है, जिसमें किसानों को 3000 रूपये प्रोत्साहन राशि मिलती है. वही किसानों को इसमें भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि मार्केट में देसी कपास का बीज नहीं मिल रहा. देसी कपास का उत्पादन कम होने की वजह से भी किसान इसमें कम ही रुचि ले रहे हैं.

किसानों ने बताया कि जींद मार्केट में केवल एक ही ऐसी दुकान है, जहां देसी बीज उपलब्ध है. पहले बीटी का चलन था, किसान नरमा व देशी कपास की खेती किया करते थे. नरमा कपास में गुलाबी सुंडी आने की वजह से ही हाइब्रिड बीटी काटन बीच का चलन बढ़ा. इसमें कई सालों तक शुरुआत में गुलाबी सुंडी का असर नहीं दिखा,  अब धीरे-धीरे काटन में भी गुलाबी सुंडी आने लगी है.

Author Meenu Rajput

नमस्कार मेरा नाम मीनू राजपूत है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर बतौर कंटेंट राइटर काम करती हूँ. मैंने बीकॉम, ऍम कॉम तक़ पढ़ाई की है. मैं प्रतिदिन हरियाणा की सभी ब्रेकिंग न्यूज पाठकों तक पहुंचाती हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं अपना काम अच्छी तरह से करू और आप लोगों तक सबसे पहले न्यूज़ पंहुचा सकूँ. जिससे आप लोगों को समय पर और सबसे पहले जानकारी मिल जाए. मेरा उद्देशय आप सभी तक Haryana News सबसे पहले पहुँचाना है.

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