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Special: आख़िर क्यों रखा जाता है करवा चौथ का व्रत, जाने इसके पीछे का कारण

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नई दिल्ली :- भारत में पुराणे समय से ही महिलाये अपने पती की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखते आ रही है. हिंदू महिलाये अपने पती को भगवान का दर्जा देती है और इसी लिए वो इस व्रत के द्वारा इस और संकेत करती है की अपने पती की रक्षा के लिए वो किसी भी कठनाई से गुजर सकती है. इस व्रत को भूखे पेट बीना पानी पिए किया जाता है. आज हम आपको इस लेख में बताएँगे की क्यों रखा जाता है ये व्रत और क्या कहानी है इस व्रत की.

कब और कैसे बनाया जाता है करवा चौथ का व्रत

बता दे कि करवा चौथ का व्रत भारत में बड़ी धूम धाम के साथ बनाया जाता है. इस दिन को भारत में पतियों का दिन भी कहा जाता है. इस दिन महिलाये अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और साथ में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है. ये व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतेक साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. महिलाये इस दिन पूरा सोलह सिंगार करती है और लाल रंग की साडी पहनती है साथ ही हाथो पर और पैरो पर मेहंदी लगाती है रात होने पर चंद्रमा को देख कर व्रत का पारण करती है.

करवा चौथ से जुडी कथा

बता दे कि वैसे तो करवा चौथ से जुडी बहुत सी कहानिया है पर हम आपको कुछ प्रमुख कथाये हमारे लेख बताएँगे तो आइए जाने व्रत की कुछ मुख्य कथाओ के बारे में.

 

वीरावती

1. बहुत समय पहले की बात है एक वीरावती नाम की महिला थी. उसके सात भाई थे. वह अपने सातों भाइयों में बहुत ज्यादा लाडली थी. उसके तनिक कष्ट भी उनके भाइयों से देखा नहीं जाता था. कुछ समय के बाद वीरावती की शादी दूसरे गांव के एक राजकुमार से हो गई.

शादी के बाद वीरावती ने पहला करवा चौथ आरंभ किया वह करवा चौथ मनाने के लिए अपने मायके आई थी. पूरे दिन वह भूखे थे ताकि रात में चांद को देखने के बाद चांद को जल अर्पित करके भोजन ग्रहण कर सके परंतु उस दिन चांद निकल ही नहीं रहा था. दिन भर निर्जल रहने के कारण वीरावती काफी कमजोर हो गई थी इसकी यह दुर्दशा उसके भाइयों से देखे नहीं जा रही थी.

तब उसके सात भाइयों में से एक भाई को एक तरकीब विचार में आता है. वह अपने अन्य भाइयों की सहायता से अपने घर के कुछ दूर घने झाड़ियों के बीच एक पेड़ पर दीपक रख देता है और उसके सामने एक छन्नी रख देता है ताकि दूर से देखने पर यह बिल्कुल चांद जैसा प्रतीत हो.

उसके बाद भागकर अपनी बहन के पास जाता है और अपनी बहन वीरावती को कहता है कि देखो बहन चांद निकल आया है. अब तुम भोजन ग्रहण कर सकती हो. वह अपने भाइयों के झांसे में आ जाती है. वह उस दीपक की रोशनी को चांद की रोशनी समझकर उसी को जल अर्पित करके भोजन ग्रहण करने बैठ जाती है.

लेकिन भोजन का निवाला मुंह में रखने से पहले ही वीरावती को अशुभ संकेत मिलने लगे. जैसे ही वह पहला निवाला अपने मुंह में लेने जाती है कि निवाले में बाल निकल आता है. उसके बाद दूसरा निवाला लेते वक्त उसे छींक आ जाती है और जैसे ही वह तीसरा निवाला उठाती है तब तक खबर आता है कि उसके पति की मृत्यु हो गई.

यह खबर सुनकर वीरावती अत्यंत दुखी हो गई और वह अपने आपको अपने इस कृत्य के लिए दोषी ठहराने लगे. उसके विलाप को देखकर भगवान इंद्र की पत्नी इंद्राणी को दया आ जाता है और वह वीरावती को सांत्वना देने के लिए उसके पास चली जाती है.

तब वीरावती इंद्राणी से पूछती है कि ऐसा उसके साथ क्यों हुआ‌? तब इंद्रानी ने कहा कि तुमने बिना चंद्रमा को देखे ही जल अर्पण कर दिया और इस व्रत को तोड़ दिया इसी कारण तुम्हारे पति की असामयिक मृत्यु हो गई.

उसके बाद वीरावती कुछ उपाय पूछती है तब इंद्रानी उसे सुझाव देती है कि तुम करवा चौथ के व्रत के साथ प्रत्येक माह की चौथ को भी व्रत रखो. यदि तुम यह व्रत श्रद्धापूर्वक करती हो तो तुम्हारा पति पुनः जीवित हो जाएगा.

उसके बाद विरावती करवा चौथ के व्रत के साथ पूरे भक्ति भाव से प्रत्येक माह की चौथ को भी व्रत रखती थी. विरावती की यह मेहनत कामयाब हुई और अंत: उसका पति जीवित हो गया.

सावित्री और यमराज

2. करवा चौथ को मनाने के पीछे एक और कथा यह भी है कि जब यमराज पतिव्रता सावित्री के पति सत्यवान के आत्मा को लेने के लिए धरती पर आए थे तब सावित्री यमराज से अपने पति के जीवन का भीख मांगने लगी. वह निवेदन करने लगी कि यमराज उसके पति की आत्मा को ना लेकर जाए.

जब यमराज नहीं माने तब सावित्री ने अन्न जल ग्रहण करना छोड़ दिया और सावित्री अपने पति के शरीर के सामने लेट कर विलाप करने लगी जिससे यमराज विचलित हो गए. तब यमराज ने सावित्री को कहा कि तुम अपने पति के प्राणों के अतिरिक्त कुछ भी वर मांग सकती हो. सावित्री के साथ सास ससुर अंधे थे उसने सर्वप्रथम अपने सास-ससुर के रोशनी वापस देने का वर मांगा.

उसके बाद उसने कई पुत्रों के संतान होने का भी वरदान मांगा. यमराज ने उसके इस दोनों वरदान पर हां कर दिया. परंतु सावित्री एक पतिव्रता पत्नी थी जिस कारण वह किसी अन्य पुरुष के बारे में सोच भी नहीं सकती थी.

इसीलिए यमराज को अंत में अपने वचन से बाध्य होकर उसके पति के प्राणों को लौटाना पड़ा था. इस तरह तब से यह मान्यता है कि महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने पति के लंबी उम्र की कामना करते हुए हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं.

 

Sunny Singh

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सनी सिंह है. मैं खबरी एक्सप्रेस वेबसाइट पर एडमिन टीम से हूँ. मैंने मास्स कम्युनिकेशन से MBA और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म का कोर्स किया हुआ है. मैंने ABP न्यूज़ में भी बतौर कंटेंट राइटर काम किया है. फ़िलहाल मैं खबरी एक्सप्रेस पर आपके लिए सभी स्पेशल केटेगरी की पोस्ट लिखता हूँ. आप मेरी पोस्ट को ऐसे ही प्यार देते रहे. धन्यवाद

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