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Rewari News

NH 48 पर धड़ल्ले से चल रही है हरियाणा रोडवेज की नकली बसें, करोड़ों रुपए की घूसखोरी से सबकी आँखे बंद

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रेवाड़ी :- दिल्ली- जयपुर नेशनल हाईवे नं. 48 पर दिल्ली से जयपुर के बीच किसी भी Stop पर कुछ मिनटों तक खड़े हो जाहिए, आपको औसत हर पांच मिनट के बाद ऐसी बस नजर आएगी, जिसे यह समझ पाना कठिन होगा कि बस रोडवेज विभाग की है या Private. रोडवेज की हमशक्ल बसें चलाने वाले लोगों ने हरियाणा रोडवेज ही नहीं, बल्कि पंजाब, हिमाचल, राजस्थान व दूसरे राज्यों की सरकारी बसों से मिलती-जुलती बसें भी रोड पर उतारी है.

सरकारी बस से पहले पहुंच कर ले जाती है सवारियां 

आम लोगों के लिए इन बसों को देखकर यह पहचान करना आसान नहीं होता.  से गुजरने वाली यह बसें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि या तो इसके पीछे बड़ा राजनीतिक Game चल रहा है या फिर करोड़ों रुपए की घूसखोरी हो रहीं है. यह बसें हरियाणा रोडवेज और राजस्थान परिवहन निगमों की बसों से आगे चलकर उनसे पहले स्टॉप पर पहुंचकर सवारी बैठाती है. जब तक सरकारी बस वहां पहुंचती, यात्री पहले वाली बस से बैठ चुके होते है. इसके बाद और यात्री एकत्रित होते ही दूसरी प्राइवेट वहां आ जाती है. लगभग एक घंटे के Gap में अवैध रूप से संचालित कई राज्यों की दस बसें जयपुर की ओर कूच कर चुकी थीं.

अफसरों से लेकर यात्रियों तक सभी हो जाते है गुमराह 

ऐसा हो रहा है कि रोडवेज बस के स्टॉप से पहुंचने से पहले अवैध रूप से संचालित बस अपना काम करते हुए वहां से निकल जाती है. रोडवेज बसों के चालक-परिचालक की नजर केवल सवारियों को ढूंढती है. इन बसों का डिजाइन इस तरीके से रोडवेज बसों से मेल खाता हुआ बनाया गया है, जिससे जांच करने वाले अफसरों से लेकर यात्रियों तक को आसानी से गुमराह किया जा सकता है. अवैध रूप से चलने वाली इन बसों से राजस्व का सर्वाधिक नुकसान हरियाणा को हो रहा है. दिल्ली और जयपुर के बीच सर्वाधिक बसें हरियाणा रोडवेज के सभी डिपो की चल रही हैं. अवैध रूप से संचालित बसों के कारण रोडवेज बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पातीं, जिस कारण विभाग को हर माह अरबों रुपए के राजस्व का घाटा हो रहा है.

आम ट्रांसपोर्टर घूस का सहारा लेकर कर रहे हैं अपना काम 

अवैध रूप से संचालित बसों पर लगाम लगाने की जिम्मदारी RTA अधिकारियों की है. जिस तरीके से नेशनल हाइवे पर दिन-रात इन बसों का निर्बाध रूप से संचालन हो रहा है, उससे यह साफ हो जाता है कि अधिकारी पूरी तरह से दबाव में है. आम ट्रांसपोर्टर घूस का सहारा लेकर अपना काम निकाल रहें है. आरटीए अधिकारियों की तरफ से इन बसों के खिलाफ कार्रवाई महज Target पूरा करने तक सीमित होती है. लगभग 6 महीने पहले प्रदेश के परिवहन आयुक्त की तरफ से अवैध रूप से संचालित बसों का नेटवर्क तोड़ने के लिए रेवाड़ी और गुरूग्राम आरटीए को छोड़कर दूसरे 6 जिलों के आरटीए सचिव और आरटीए कार्यालयों के अन्य अधिकारियों की टीमें भी बनाई गई थी.

एक हफ्ते की चेकिंग में बसे हो गई थी लापता 

चौंकाने वाली बात यह थी कि इन टीमों ने पहले ही दिन अपनी कार्रवाई में लगभग 125 अवैध रूप से संचालित बसों को पकड़ते हुए करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया. एक हफ्ते की Checking से ही अवैध रूप से संचालित बसें नेशनल हाइवे से लापता हो गई.  अब एक बार फिर इन बसों का संचालन हो रहा है. देखना यह है कि परिवहन आयुक्त की तरफ से अब इन बसों के खिलाफ Action लेने में कितना वक़्त लगेगा. इन बसों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई है. जांच में इनके Tax और परमिट सही पाए गए हैं. इन बसों पर Online जुर्माना किया जाता है. इंपाउंड करते ही उन्हें यात्रियों के विरोध का सामना करना पड़ता है.

Author Deepika Bhardwaj

नमस्कार मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हूं. मैंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करती हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुंचाती हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

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