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Haryana News

नैनो उर्वरक बदलेगा खेती करने का नजरिया, बढ़ेगी किसानों की आय और घटेगी खेती की लागत

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चंडीगढ़ :- मौजूदा समय में खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है. बता दे कि देश में जितना ध्यान खाद्यान्न उत्पादन पर दिया जाता है, उतना ध्यान खेती की लागत घटाने और उपज के भंडार विपणन पर नहीं दिया जाता, जिस वजह से किसानों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार की तरफ से भी कई संभव प्रयास किए गए, परंतु उन सभी प्रयासों से केवल तत्कालिक राहत प्रदान होती है.

सरकार ने इन योजनाओं पर दिया विशेष ध्यान 

जैसे सरकार की तरफ से कृषि ऋणों की माफी, 2014 में PM मोदी ने खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए दूरगामी उपाय करने शुरू किए, इनमें नीम कोटेड यूरिया, ऑपरेशन ग्रीन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मंडियों का आधुनिकरण एवं ई- नाम योजना आदि योजनाएं शामिल है. मोदी सरकार ने सर्वाधिक बल फसल विविधीकरण पर दिया, जिससे फसल चक्र का पालन हो और खेती की लागत में भी कमी आई.

सरकार दे रही है प्राकृतिक खेती को बढ़ावा 

इसी दिशा में सरकार की तरफ से मोटे अनाज, दलहन, तिलहनी फसलों के समर्थन मूल्य में भरपूर बढ़ोतरी की गई .साथ ही Government ने इनकी खरीद को भी बढ़ावा दिया. अब सरकार की तरफ से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट आदि के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. वही यूरिया नीति के सकारात्मक Result भी अब सामने आने शुरू हो गए हैं.

इस वजह से प्रभावित हुई यूरिया की कीमतें 

बता दे कि साल 2025 तक गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी आदि के उर्वरक संयंत्रों के अलावा अन्य स्थानों पर भी नए संयंत्र पूरी क्षमता के साथ Production शुरू कर देंगे. इसके बाद भारत साल 2025 तक यूरिया के मामले में पूर्ण तरह से आत्मनिर्भर बन जाएगा. इस साल रूस- यूक्रेन युद्ध की वजह से भी देश में यूरिया की उपलब्धता काफी प्रभावित हुई है, जिस वजह से इसकी कीमतें भी प्रतिदिन आसमान छू रही है.

2025 तक भारत यूरिया में होगा आत्मनिर्भर  

यही वजह है कि Current Financial year में उर्वरक सब्सिडी के 2.5 लाख करोड़ रूपये पार कर जाने का अनुमान है, जो Last year महज 1.62 लाख करोड़ रूपये थी. यूरिया के मामले में भारत को आत्मनिर्भरता दिलाने में सबसे अहम भूमिका नैनो यूरिया की रही है. नैनो कोणों से निर्मित यूरिया का एक प्रकार है जिसमें पौधों को पोषक तत्व प्रदान करने वाला तरल नाइट्रोजन होता है. बता दे कि नैना यूरिया की आधा लीटर की एक बोतल में नाइट्रोजन के तकरीबन 40, हजार कण होते हैं, जो एक बोरी यूरिया के बराबर है.

Author Meenu Rajput

नमस्कार मेरा नाम मीनू राजपूत है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर बतौर कंटेंट राइटर काम करती हूँ. मैंने बीकॉम, ऍम कॉम तक़ पढ़ाई की है. मैं प्रतिदिन हरियाणा की सभी ब्रेकिंग न्यूज पाठकों तक पहुंचाती हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं अपना काम अच्छी तरह से करू और आप लोगों तक सबसे पहले न्यूज़ पंहुचा सकूँ. जिससे आप लोगों को समय पर और सबसे पहले जानकारी मिल जाए. मेरा उद्देशय आप सभी तक Haryana News सबसे पहले पहुँचाना है.

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