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कैथल में अंग्रेजों के जमाने की 130 साल पुरानी लाल कोठी आज भी संजोए है इतिहास, स्कूल खुलवाने के लिए ग्रामीणों ने दिया था फ्लोर टेस्ट

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कैथल :- मानचित्र (Map) पर बेचिराग गांव के रूप में पहचान रखने वाले कलायत के गांव खडालवा की धरती पर वर्ष 1954 में शिक्षा की अलख जगाने के लिए ग्रामीणों को बड़ी परेशानियों भरा रास्ता चलना पड़ा था. प्राथमिक पाठशाला से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सफर के साक्षी 81 वर्षीय बुजुर्ग टेक राम मौण उम्रदराज होने के बाद भी इस अध्याय के एक-एक अक्षर को अपने जहन में संजोए हुए हैं.

उस जमाने के बुजुर्ग दसवीं कक्षा तक पढ़े है. वे बताते हैं कि निरक्षरता की समस्या को देखते हुए मटौर गांव के लोगों ने बढ़सीकरी गांव स्थित सिंचाई विभाग की आजादी से पहले निर्मित लाल कोठी पर तत्कालीन राजस्व मंत्री इंद्र सिंह के सामने पाठशाला खुलवाने की मांग की थीं. उस दौरान टेक राम मौण तीसरी कक्षा के छात्र थे. मंत्री ने शिष्टमंडल को प्राथमिक पाठशाला के लिए 60 विद्यार्थियों की हाजिरी सुनिश्चित करने का तर्क दिया था. हैरानी की बात है कि उस समय पढ़ाई के लिए इतने विद्यार्थी ज्यादा इच्छा नहीं रखते थे.

विद्यालय के लिए संसाधन जुटाना थी बड़ी समस्या

दो-चार युवा ही आस-पड़ोस और दूरदराज इलाकों में स्थित स्कूलों में पढ़ रहे थे. इसलिए ग्रामीणों ने विशेष जागृति अभियान चलाकर हाली-पालियों को भी स्कूल में प्रवेश करने के लिए राजी किया. आखिरकार आंकड़ा पूरा हो गया और मंत्री ने वादे अनुसार स्कूल खुलवाने का फैसला किया. अब विद्यालय के लिए संसाधन (Resource) जुटाना भी बड़ी समस्या थी. इसके लिए मटौर के ग्रामीणों ने शिमला गांव से सांझा स्कूल स्थापित करने का सहयोग मांगा. इस गांव में पहले ही स्कूल संचालित था, इसलिए बात सिरे नहीं चढ़ पाई फलस्वरूप पड़ोसी गांव बढ़सीकरी के लोगों से इस विषय को लेकर जब चर्चा की गई तो बात बन गई और खडालवा प्राचीन शिव मंदिर के पास पाठशाला को शुरू किया गया.

पहले सत्र में 14 विद्यार्थियों ने पास की पांचवीं की परीक्षा

खडालवा में शुरू हुई सरकारी पाठशाला के प्रथम सत्र में 14 विद्यार्थियों ने पांचवीं कक्षा की परीक्षा पास की थी. इसके बाद भी पढ़ाई-लिखाई एक अभियान ही बन गया. वर्तमान में बढ़सीकरी, मटौर व आसपास के गांव के विद्यार्थी उच्च तालीम हासिल कर विभिन्न क्षेत्रों में नित कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. इस तरह समय रहते ग्रामीणों के संयुक्त रूप से उठाए गए कदमों के अभूतपूर्व परिणाम आज सबको देखने मिल रहे हैं.

कालेज को दान में दिया कमरा

दसवीं कक्षा तक पढ़े टेक राम मौण ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पहल की थी. वर्ष 2007 में इनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया. इनकी रस्म पगड़ी पर होने वाले अनाप-शनाप व्यय पर अंकुश लगाते हुए उन्होंने कलायत स्थित श्री कपिल मुनि महिला कालेज में एक कमरे का निर्माण करवाया.

Author Deepika Bhardwaj

नमस्कार मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हूं. मैंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करती हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुंचाती हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

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