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Haryana News

हरियाणा मे पशुपालन डॉक्टरों और हेल्पर की भारी कमी, कैसे काबू होगा लंपी वायरस

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चंडीगढ़ :- हरियाणा में पशुओं में गांठ जैसी बीमारी फैलने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. गायों के बाद भैंसों में भी इस रोग के लक्षण दिखने लगे हैं. वहीं स्वस्थ पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान को गति नहीं मिली है. गॉट पॉक्स की दवा जिलों में पहुंच चुकी है, फिर भी कई जिलों में टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है.

टीकाकरण व्यवस्था का कार्य प्रगति में 

विभाग में 650 वीएलडीए की कमी से पशुओं पर संकट गहराने लगा है. प्रदेश के 14 जिलों में चर्म रोग लम्पी का संक्रमण पहुंच गया है. करीब 18 हजार जानवर इसकी चपेट में आ चुके हैं. विभाग ने स्वस्थ पशुओं को बचाने के लिए 3 लाख डॉज गॉट पार्कों को एयरलिफ्ट किया है. जिलों में इसका वितरण भी हो चुका है, बावजूद इसके टीकाकरण में तेजी नहीं आई है. बुधवार को राज्य भर में सिर्फ 2500 पशुओं का ही टीकाकरण किया गया. इसके पीछे मुख्य कारण डॉक्टरों और सहायकों की कमी है.

क्या वीएलडीए है जिम्मेदार?

हरियाणा पशुपालन विभाग में कुल 4432 पद स्वीकृत हैं. इनमें से वेटरनरी सर्जन के 1144 पद, बीएलईओ के 116 और वीएलडीए (पशु चिकित्सा पशुधन विकास सहायक) के 3037 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 650 से अधिक पद खाली हैं. टीकाकरण से लेकर दवा आदि पशुओं तक हर चीज के लिए वीएलडीए जिम्मेदार है. उल्लेखनीय है कि राज्य में कुल 71.26 लाख पशु हैं. इनमें 43.77 लाख भैंस और 19.32 लाख गाय हैं. यदि 18 हजार प्रभावित पशुओं को छोड़ दिया जाता है तो विभाग को 19 लाख से अधिक गायों का टीकाकरण करने में कई महीने लगेंगे. प्रदेश में पशुओं के लिए कुल सरकारी अस्पताल 1041, डिस्पेंसरी 1815, 6 पॉलीक्लिनिक व 22 लैब.

इन जिलों में पहुंची दवाएं

पशुपालन विभाग के पास अंबाला, भिवानी 451, फतेहाबाद 222, फरीदाबाद-गुरुग्राम 81-81, हिसार 252, झज्जर 99, जींद 60, कैथल 144, कुरुक्षेत्र 81, महेंद्रगढ़ 201, पंचकूला 201 में गोट पॉक्स दवा की 100 शीशियां (100 मिली) हैं. शीशियां 91, पानीपत 231, रेवाड़ी 200, रोहतक 100, सिरसा 261, सोनीपत को भेजी गई हैं.

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