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हरियाणा में छा सकता है बिजली संकट, पानीपत थर्मल प्लांट में बचा मात्र 7 दिन का कोयला

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पानीपत :- हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से कोयले की कमी चल रही है. जिसका असर बिजली की सप्लाई पर भी देखने को मिल सकता है. जबकि हरियाणा के उप – मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कहना है की हरियाणा में बिजली की समस्या उत्पन्न नहीं होने देंगे. हरियाणा में अधिकतर बिजली उत्पादन इकाईया कोयले पर आधारित है, लेकिन कोयले की कमी के कारण हरियाणा के कोयले आधारित बिजली सयंत्रो को बंद भी करना पड़ सकता है. तापमान में वृद्धि के कारण गर्मी से निजात पाने के लिए बिजली की मांग भी बढ़ती जा रही है.

एक दिन में 10500 टन कोयले की होती है खपत

बिजली की कमी के कारण पानीपत थर्मल पावर प्लांट की 3 इकाइयां 210 मेगावाट की इकाई नंबर 6, और 250-250 मेगावाट क्षमता की इकाई नंबर 7 व 8 चलाई जा रही है. इन तीनों इकाइयों को चलाने के लिए 10500 टन कोयला प्रतिदिन चाहिए होता है. वर्तमान समय में पानीपत थर्मल पावर प्लांट में 66000 टन कोयला ही विशेष बचा है जोकि लगभग 6 से 7 दिन ही चल पाएगा.

पानीपत थर्मल पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर एस एल सचदेवा का कहना है की फिलहाल उनके पास लगभग 1 सप्ताह का ही कोयला stock में है यदि बेड स्टॉक भी मिला दिया जाए तो केवल 10 दिन का ही कोयला उनके पास है. उन्होंने बताया की कोयले की कमी के चलते उनके पास कोयला बहुत कम मात्रा में पहुंच रहा है.

कहां कहां होती है बिजली सप्लाई

थर्मल प्लांट में तैयार किए गए बिजली जाना के दूसरे जिलों में भी भेजी जाती है जिसमे 2 बिजली फीडर रोहतक, 2 फीडर जींद, 1 फीडर बस्ताड़ा, 3 फीडर सफीदो, 3 फीडर निडसशंग आदि में भेजी जाती है. अगर कोयले की कमी हो गई तो यूनिट बंद करनी पड़ सकती है जिस कारण प्रदेश में बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है.

Author Shweta Devi

मेरा नाम श्वेता है. मैं हरियाणा के भिवानी जिले की निवासी हूं. मैंने D.Ed और स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर ली है. वर्तमान में मै Khabri Express पर बतौर लेखक के रूप में कार्य कर रही हूं. मै सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीम, एजुकेशन और लाइफ स्टाइल से जुड़े विभिन्न कंटेंट जितनी जल्द हो सके पाठको तक पहुंचाने की कोशिश करती हूँ.

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