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Ambala News

अंबाला सेंट्रल जेल से जुड़ी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की यादें, नाथू राम गोडसे को यही दी गई थी फांसी

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अंबाला :- अंबाला शहर की सेंट्रल जेल से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की कई यादें जुड़ी है. 175 साल पुरानी अंबाला की इस ऐतिहासिक जेल से महात्मा गांधी वह अनेक स्वतंत्रता सेनानियों व महापुरुषों के नाम जुड़े हैं.  किपलिंग के विश्व विख्यात उपन्यास “ किम” में भी अंबाला जेल का वर्णन मिलता है, लेकिन अब इस जेल को प्रदेश सरकार यहां से ट्रांसफर करने जा रही है.

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान  स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य गढ़ था 

अंबाला में नई Jail बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. इस मामले को लेकर अंबाला शहर निवासी Advocate रोहित जैन एवं कांग्रेस के कोषाध्यक्ष ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित जेल मंत्री को पत्र लिखकर Central Jail को ढांचे से छेड़छाड़ न कर उसे ऐतिहासिक स्मारक घोषित करने की विनती की है. रोहित जैन ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को जो पत्र भेजा है उसमें कहा है कि इतिहास के पन्ने पलटने पर पता चलता है कि British सरकार ने इसे पहले उप जेल के रूप में स्थापित किया था. 1930 में इसे जिला जेल के रूप में बदल दिया गया. सन 1947 में इसे सेंट्रल जेल का नाम मिला. तब इस जेल में 7 Block एवं दो मंजिल में सैंकड़ों कमरों के अतिरिक्त महिला वार्ड, अस्पताल, फैक्टरी, गोदाम, सिक्योरिटी वार्ड आदि करीब 12 एकड़ भूमि पर निर्मित किए गए थे. स्वाधीनता आंदोलन के समय यह जेल स्वाधीनता संग्राम के योद्धाओं का प्रमुख गढ़ था.

 इन लोगों अंबाला को जेल में दी गई थी फांसी

  • 1912 में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग पर दिल्ली के चांदनी चौक में जुलूस के दौरान बम फेंकने वाले चार जांबाज क्रांतिकारियों में एक बसंत कुमार विश्वास भारत माता के सच्चे बेटे थे. उन्हें 20 साल की उम्र में अंबाला सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी.
  • 3 सितंबर 1915 को सैन्य विद्रोह के मामले में ब्रिटिश शासन ने अंबाला जेल में 12 लोगों को फांसी दी थी. 18 लोगों को ब्रिटिश इंडिया Army ने फांसी की सजा सुनाई थी. बाद में 6 साल की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया.
  • स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तर प्रदेश की प्रथम मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी भी इस जेल में रही थीं. जिनका जन्म अंबाला में ही हुआ था और स्वाधीनता के बाद वह उत्तर प्रदेश की प्रथम मुख्यमंत्री बनी थी. वह सन 1931 के जंगल सत्याग्रह में भाग लेने के बाद सन 1932 में पहले तिहाड़ जेल में थी, बाद में उन्हें एकांकी परिरोध की सजा भुगतने के लिए अंबाला जेल भेज दिया गया.
  • प्रसिद्ध राष्ट्रीय नेता मौलाना साबरी भी स्वाधीनता संघर्ष के दौरान अंबाला जेल में ही रहे थे. मौलाना साबरी ने अपनी पहली पुस्तक “ History Of Crime And Punishment ” यहीं पर लिखी थी. जो की बंदी जीवन पर Based थी.
  • अमर शहीद भगत सिंह की बहन एवं क्रांतिकारी बीवी अमर कौर ने सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लाहौर जेल पर तिरंगा ध्वज फहराया था. उन्हें अक्टूबर 1942 में अंबाला जेल में ही डाला गया था.
  • आजाद भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर को भी भारत छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेज सरकार के निर्मम अत्याचारों को झेलना पड़ा था. उन्हें भी इस जेल के एक बेहद तंग, गंदी, अंधेरी कोठरी में एकांकी रुप से रखा गया था. जब उनके भाई की मौत हुई तब भी उन्हें सूचना नहीं दी गई.
  • महात्मा गांधी की हत्या के अभियोग में नाथू राम गोडसे एवं उनके साथियों पर शिमला के निकट पीटर हाफ स्थित ईस्ट पंजाब कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी. 8 नवंबर 1949 को निर्णय सुनाया गया और एक हफ्ते के अंदर 15 नवंबर 1949 को मंगलवार के दिन अंबाला सेंट्रल जेल में नाथू राम गोडसे एवं नारायण आप्टे को फांसी दी गई.

 1989 में दी गई थी आखिरी बार फांसी 

कहा जाता है की उन्हें सूर्योदय के समय फांसी दी गई और जेल से एक Jeep द्वारा गोपनीय रूप से उनके शव को किसी अज्ञात स्थल पर ले जाया गया,जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया. वह फांसी का तख्त आज भी अंबाला जेल में है. पंजाब के तीसरे मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के हत्यारे सुच्चा सिंह एवं बलदेव सिंह को भी 1972 में अंबाला जेल में ही फांसी पर लटकाया गया. यूं तो अंबाला सेंट्रल जेल में अब तक 29 लोगों को आजादी उपरांत फांसी दी गई, लेकिन आखिरी बार 21 जून 1989 को यहां पर करनाल के गुलाब सिंह को फांसी दी गई थी. उसके बाद यहां फांसी के तख्तों का प्रयोग नहीं हुआ.

Author Deepika Bhardwaj

नमस्कार मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हूं. मैंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करती हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुंचाती हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

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