Join Telegram Group Join Now
Join WhatsApp Group Join Now
New Delhi

अगस्त माह में गेहूं के दामों मे आई जबरदस्त तेजी, कुछ महीनों मे दो गुना तक बढ़ सकती है कीमत

इस न्यूज़ को शेयर करे:

नई दिल्ली :- भारत में आने वाले महीनों में महंगाई दर में और इजाफा देखने को मिल सकता है. मौजूदा समय में क्रूड ऑयल, पाम क्रूड, इलेक्ट्रिसिटी और फल सब्जियों की Prices की वजह से महंगाई में इजाफा देखने को मिला है. आने वाले दिनों में गेहूं के दाम इसका अहम कारण बन सकते हैं, क्योंकि गर्मियों तक ‘दुनिया का पेट भरने’ का इच्छुक देश सर्दियों में इसकी कमी से जूझ रहा होगा.

गेहूं की कीमतें आसमान छू रही

पिछले वर्ष 2021-22 की तुलना में जब इंडिया ने लगभग 7.2 मिलियन टन गेहूं निर्यात किया था. चालू वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक यह निर्यात 6 Million Tones होने का अनुमान है. भारत ने Wheat की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद्य मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए इस साल मई में निर्यात प्रतिबंध की घोषणा की थी, लेकिन उपभोक्ता मामले, Food and Public Distribution के आंकड़ों से पता चलता है कि गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं. 6 August को पूरे Country में गेहूं के आटे की औसत खुदरा और थोक कीमतें साल-दर-साल के लिहाज से क्रमशः 14 प्रतिशत और 19 प्रतिशत अधिक थीं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमतों में 14.5% की गिरावट

पिछले वर्ष की 5 अगस्त की तुलना में गेहूं के आटे की खुदरा कीमतें दिल्ली में 21 फीसदी अधिक, मुंबई में 29 फीसदी अधिक और कोलकाता में 46 फीसदी अधिक थीं. इसके विपरीत, जुलाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमतों में 14.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसका कारण कुछ हद तक Russia and Ukraine के बीच Black Sea क्षेत्र में बंदरगाहों को अनब्लॉक करने का समझौता रहा है, जिसके तहत यूक्रेनी अनाज के निर्यात की अनुमति दी गई है. गेहूं का Government Stock खाद्य सब्सिडी योजनाओं और रणनीतिक भंडार के लिए आवश्यक स्टॉक से थोड़ा ही अधिक है. 22 जुलाई तक भारत में 27.6 मिलियन टन के Stock मानदंडों के मुकाबले सार्वजनिक स्टॉक में 27.8 मिलियन टन गेहूं था. मौजूदा शेयर 14 साल में सबसे निचले स्तर पर है.

सार्वजनिक खरीद पिछले वर्षों की तुलना में रही कम

खाद्य सचिव Sudhanshu Pandey ने इस हफ्ते के शुरू में CNBC आवाज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, ‘इस साल गेहूं की सार्वजनिक खरीद पिछले वर्षों की तुलना में कम रही है, लेकिन हमारे पास चावल और गेहूं का पर्याप्त मात्रा में भंडार है. अगर कीमतें एक सीमा को पार करती हैं तो हम हस्तक्षेप कर सकते है. सुधांशु ने आगे कहा हम स्थिति पर गहराई से नजरें बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय हित में उपयुक्त कदम उठाएंगे.

महानगरों में खुदरा कीमतें 20 प्रतिशत बढ़ी

पूर्व कृषि सचिव Siraj Hussain ने बताया कि प्रमुख महानगरों में गेहूं के आटे की खुदरा कीमतें 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कोई भी सरकार मुख्य अनाज की कीमतों में इतनी तेजी से वृद्धि को लेकर सहज नहीं हो सकती, खासकर जब चावल उत्पादक मुख्य राज्यों में बारिश कम नजर आ रही हो. भारतीय खाद्य निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक हुसैन ने कहा, अगर कीमतें और बढ़ती हैं तो बहुत संभव है कि गेहूं पर आयात शुल्क खत्म कर दिया जाए. चालू खरीफ फसल मौसम में Rice उत्पादन घटने के जोखिम ने गेहूं को लेकर स्थिति को और खराब कर दिया है.

अक्टूबर-नवंबर तक 3,000 रुपये तक पहुंच सकती हैं कीमते

उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में कम बारिश और कम रोपण के कारण, भारत का चावल उत्पादन 2022-23 में लगभग 10 Million Tonnes तक गिर सकता है. सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य Uttar Pradesh के एक आटा मिल मालिक Sandeep Bansal ने कहा कि प्रतिबंध की घोषणा से पहले थोक मिल-गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमतें April में 2,200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर August के शुरू में लगभग 2,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं. बंसल ने कहा कि ये कीमतें October-November तक 2,800 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं, जिससे सरकार को आयात शुल्क कम करने और व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट जैसे कदमों की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

Sunny Singh

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सनी सिंह है. मैं खबरी एक्सप्रेस वेबसाइट पर एडमिन टीम से हूँ. मैंने मास्स कम्युनिकेशन से MBA और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म का कोर्स किया हुआ है. मैंने ABP न्यूज़ में भी बतौर कंटेंट राइटर काम किया है. फ़िलहाल मैं खबरी एक्सप्रेस पर आपके लिए सभी स्पेशल केटेगरी की पोस्ट लिखता हूँ. आप मेरी पोस्ट को ऐसे ही प्यार देते रहे. धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button