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गेहूं एक्सपोर्ट में भारी उछाल से सरकार और किसानों की बल्ले-बल्ले, दुनिया ने माना भारत का लोहा

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नई दिल्ली :- युक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में भारत के गेहूं की मांग और भी ज्यादा बढ़ गई है. गेहूं की मांग में वृद्धि होने के कारण किसानों को इसका खूब लाभ मिल रहा है. एक दशक से अधिक समय के बाद यह देखने को मिल रहा है कि भारतीय किसान अपनी गेहूं की फसल को राज्य सरकार के भंडारण की जगह निजी कर्मचारियों को MSP से अधिक मूल्य पर बेच रहे हैं. गेहूं उत्पादकों को उनकी फसल के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत मिल रही है, इसलिए किसान निजी कर्मचारियों को अपनी फसलों को बेच रहे है, इसके साथ ही राज्य खरीद एजेंसियों पर भी खरीदारी का दबाव कम हो रहा है जो अंतिम खरीददार के तौर पर भारी कर्ज लेती है. अबकी बार गेहूं की कीमतों में भारी उछाल आया है. ऐसे मे भारतीय किसानों ने भी ज्यादा मात्रा में गेहूं की फसल उगाई है, और ज्यादा से ज्यादा लाभ ले रहे है.

MSP से अधिक भुगतान करने के लिए भी व्यापारी तैयार

भारतीय किसान राजन सिंह पवार का कहना है कि काफी लंबे समय के बाद ऐसा हुआ है कि व्यापारी एमएसपी से अधिक कीमत देने के लिए भी तैयार हैं. उनका इशारा भारतीय खाद्य निगम की तरफ था, जो किसानों से अनाज खरीदता है. मध्य प्रदेश का एक किसान जो अपने गेहूं के उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाता हैं, उसका कहना है कि भारत के बढ़ते हुए गेहूं के निर्यात के कारण हमारे जैसे किसानों की बहुत सहायता हुई है . गेहूं के खेतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि से पहले भारत को अनाज का निर्यात करने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ता था.

भारत को एक्सपोर्ट करने का सुनहरा मौका

उच्च अंतरराष्ट्रीय कीमतों और लगातार रिकॉर्ड फसलों, और डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपए के दुर्लभ संगम ने भारत के शिपमेंट को और भी ज्यादा आकर्षक बना दिया है. फूड एंड एग्री बिजनेस ओलम एग्रो इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता का कहना है कि अपने सरप्लम एक्सपोर्ट करने का भारत के लिए यह सुनहरा मौका है. अंतरराष्ट्रीय गेहूं बाजारों के लिए भारत के विक्रय काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन युद्ध और कनाडा की फसल कटौती और ऑस्ट्रेलिया के गुणवत्ता में गिरावट के कारण उनकी आपूर्ति की कमी को दूर करने में सहायता कर रही है.

सरकार को हो रहा फायदा 20,150 रूपये प्रति टन बिक रहा है गेहूँ

निजी अनाज संचालक एमएसपी से अधिक कीमतों यानि 20,150 प्रति टन पर गेहूँ की मांग कर रहे है. इसका मतलब यह है कि FCI की गेहूं की खरीद मैं  अबकी बार भारी कमी की आशंका दिखाई दे रही है. सरकारी खरीद कहने का तात्पर्य है सरकार के बजट में भी बचत होगी, और पिछले साल भारत के किसानों से गेहूँ ख़रीदने के लिए रिकॉर्ड 43.34 मिलियन टन गेहूं  के लिए 856 अरब रुपए खर्च किए गए थे. FCI पर 30 मिलियन टन गेहूँ से कम हो सकती है ऐसा सरकारी अधिकारियों का कहना है.

राजेश पहाड़िया जैन जिनका निवास स्थान दिल्ली है उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारियों ने 330 डॉलर से लेकर 335 डॉलर तक प्रति टन के बीच गेहूं के निर्यात सौदों पर हस्ताक्षर किया है. लेकिन यह लगभग 50 डॉलर प्रति टन सस्ता है प्रतिद्वंदी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना मे, क्योंकि वैश्विक कीमतों में वृद्धि होने के कारण और घर पर पड़े स्टॉक ने भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए छूट देने की पेशकश करना और भी ज्यादा आसान बना दिया है, लेकिन फिर भी यह स्थानीय कीमतों से कहीं ज्यादा है.निर्यात सौदों में गड़बड़ी के बाद फरवरी और मार्च में तय किए गए निर्यात, भारत में गेहूं शिपमेंट वित्तीय वर्ष में मार्च में रिकॉर्ड 7.85 मिलियन टन तक पहुंच गया था, जो कि पिछले साल की अपेक्षा 2.75 प्रतिशत अधिक है. व्यापारियों का कहना है कि 2022- 23 तक वित्तीय वर्ष में निर्यात 1.2 करोड़ टन तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी. जिसकी वजह से भारत वैश्विक बाजारों में एक गंभीर खिलाड़ी बनकर सामने आया है. फसल की गुणवत्ता में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण भी भारत को निर्यात मे बहुत सहायता मिली है.

बताया जा रहा है की हाल ही में निर्यातको के द्वारा दुनिया के सबसे समझदार उपभोक्ताओं को गेहूं की बिक्री की है. ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं खरीदने वाला देश मिस्र ने भारत से भारी मात्रा मे गेहूँ की खरीद की है. जिसकी वजह से भारत को उच्च स्तरीय आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है. उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को व्यापक रूप से अपनाने वाली गुणवत्ता में भारी वृद्धि हुई है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेट एंड जो रिसर्च अनुसंधान केंद्र के प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि पिछले एक दशक से पेश किए जा रहे सिर्फ 10 गेहूं के बीजों के किस्सों में पिछले वर्ष में गेहूं के साथ लगाए गई करीब 31.5 मिलियन हेक्टेयर का 70 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा था.

Author Shweta Devi

मेरा नाम श्वेता है. मैं हरियाणा के भिवानी जिले की निवासी हूं. मैंने D.Ed और स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर ली है. वर्तमान में मै Khabri Express पर बतौर लेखक के रूप में कार्य कर रही हूं. मै सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीम, एजुकेशन और लाइफ स्टाइल से जुड़े विभिन्न कंटेंट जितनी जल्द हो सके पाठको तक पहुंचाने की कोशिश करती हूँ.

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