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New Delhi

GST News: अब किराए के मकान में रहने पर भी देना होगा Tax, लाखो लोग होंगे प्रभावित

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नई दिल्ली :- GST के नए रूल के अंतर्गत किराए के घरों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण Rule लागू हो चुका है. जुलाई से लागू होने वाले इन नियमों के अनुसार रिहायशी प्रॉपर्टी को Rent पर लेकर रहने वाले किरायेदारों को रेंट के साथ में 18% जीएसटी टैक्स भी देना होगा. यह नियम बस उन किरायेदारों के लिए मान्य होगा जो किसी Business के लिए जीएसटी के अंतर्गत रजिस्टर्ड है. पहले नियमों के अनुसार व्यवसायिक प्रॉपर्टी जैसे कि office या रिटेल स्पेस जैसी जगह को रेंट पर लेने पर ही जीएसटी लगता था.

बिजनेस मालिकों के लिए 40 लाख लिमिट 

GST के अंतर्गत रजिस्टर्ड किराएदार की कैटेगरी में सामान्य तथा कॉर्पोरेट संस्थाएं सब आएंगे. वार्षिक टर्नओवर तय सीमा से ऊपर चले जाने पर बिजनेस ओनर को जीएसटी Registration करवाना अति आवश्यक है. इसके लिए निर्धारित सीमा क्या है, यह बिजनेस पर आधारित है. अलग-अलग सेवाएं दे रहे बिजनेस मालिकों को लिए सालाना लिमिट 20 लाख रुपए का Turnover है. जबकि सामान्य सामान बेचने वाले या Supply करने वाले बिजनेस मालिकों के लिए यह लिमिट 40 लाख रुपए रखी गयी है, लेकिन अगर किराएदार उत्तर पूर्वी राज्य या विशेष दर्जा प्राप्त राज्य का है तो उसके लिए टर्नओवर की सीमा सालाना 10 लाख है. जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक के बाद इस नए परिवर्तन का प्रभाव ऐसी कंपनी या कारोबारियों पर पड़ेगा.

बिजनेस चलाने वाले किराएदार को भरना होगा 18% टैक्स

रियासी प्रॉपर्टी को बेशक कोई कॉरपोरेट हाउस रेंट पर ले या कोई आम किराएदार इस पर किसी प्रकार का कोई जीएसटी नहीं लगता था. बल्कि इस नए नियम के अनुसार जीएसटी रजिस्टर्ड किराएदार को Reverse Charge Mechanism के अंतर्गत टैक्स देना होगा. वही इनपुट टैक्स क्रेडिट के अंतर्गत डिडक्शन दिखाकर GST को क्लेम कर सकता है. आपको बता दे कि यह जो 18% जीएसटी है, यह तभी लागू होगा जब किराएदार जीएसटी के अंतर्गत रजिस्टर्ड होगा और जीएसटी भरने वाली कैटेगरी में आता होगा. रिहाएसी प्रॉपर्टी को किराए पर लेकर बिजनेस चलाने वाले किराएदार को 18% टैक्स भरना होगा.

बढ़ जाएगा एंप्लॉय कॉस्ट

जिन्होंने अपने बिजनेस के लिए रिहायशी Property को रेंट पर लिया हुआ है. वही ऐसी कंपनियां भी इस खर्च को वहन करेंगी जो रिहायशी प्रॉपर्टी को किराए पर लेकर इसे गेस्ट House के तौर पर इस्तेमाल करती हैं या फिर कर्मचारी के लिए रहने की जगह प्रदान करवाती है. कर्मचारियों को फ्री में रहने की जगह देने वाली कंपनियों पर इस से एंप्लॉय कॉस्ट बढ़ जाएगा.

Sunny Singh

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सनी सिंह है. मैं खबरी एक्सप्रेस वेबसाइट पर एडमिन टीम से हूँ. मैंने मास्स कम्युनिकेशन से MBA और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म का कोर्स किया हुआ है. मैंने ABP न्यूज़ में भी बतौर कंटेंट राइटर काम किया है. फ़िलहाल मैं खबरी एक्सप्रेस पर आपके लिए सभी स्पेशल केटेगरी की पोस्ट लिखता हूँ. आप मेरी पोस्ट को ऐसे ही प्यार देते रहे. धन्यवाद

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