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New Delhi

कारोबारियों के लिए खुशखबरी: विंटर स्कूल ड्रेस की बंपर डिमांड, 40% तक बढ़ सकते हैं दाम

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नई दिल्ली :- कोरोना काल के दो साल तक स्कूली कपड़ों का कारोबार करने वाले कारोबारियों को मंदी का सामना करना पड़ा. इस साल स्कूल ड्रेस (School Dress) की बंपर डिमांड रही. अच्छी मांग को लेकर ड्रेस व्यापारी उत्साहित हैं, लेकिन कीमत अधिक होने से समस्या बनी हुई है. स्कूल ड्रेस में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की कीमत में 40% का इजाफा हुआ है. जिससे व्यवसाय की पूंजीगत लागत बढ़ गई है.

कपड़ो की बढ़ी कीमत

जो कपड़ा 100 रुपये प्रति मीटर मिलता था, उसकी कीमत 165 रुपये से 170 रुपये प्रति मीटर हो गई है. टी-शर्ट बनाने के लिए जो कपड़ा 330 रुपये किलो मिलता था वह 450 रुपये किलो तक पहुंच गया है. यह छह महीने में दर्ज किया गया है.

विंटर ड्रेस की हुई डिमांड

पानीपत में हर साल 40-50 करोड़ का स्कूल ड्रेस का कारोबार होता है. इससे सरकार को 5% GST से राजस्व मिलता है. स्कूल खुलने के साथ ही अप्रैल से ड्रेस की डिमांड चल रही है. फिलहाल स्कूल ड्रेस का बिजनेस करने वाले दुकानदार विंटर ड्रेस तैयार करने में लगे हैं. सर्दियों में स्वेटर, जर्सी, ब्लेजर, फुल साइज शर्ट, पैंट, जैकेट की डिमांड रहती है.

पानीपत में होजरी का कपड़ा लुधियाना से आता है. सूट का कपड़ा भीलवाड़ा से आता है, सफेद शर्ट का कपड़ा अहमदाबाद से आता है और चेक शर्ट का कपड़ा भिवंडी, मुंबई से आता है.

सूत के दाम हुए महंगे

फिलहाल लुधियाना के होजरी फैब्रिक में 40% की बढ़ोतरी हुई है. भीलवाड़ा से आने वाला सूटिंग कपड़ा 100 रुपए प्रति मीटर से बढ़कर 165-170 रुपए हो गया है. होजरी के कपड़े की कीमत 330 रुपये से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलो हो गई है.

स्कूल यूनिफॉर्म की टी-शर्ट, ब्लेजर जैकेट बनाने वाले आनंद इंटरप्राइजेज इंद्र बाजार के दुकानदार राजू चावला ने बताया कि धंधा तो चल रहा है, लेकिन महंगाई ज्यादा है. जैसे-जैसे कीमत बढ़ती है, लागत भी बढ़ती जा रही है. कपड़ों के दाम तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों के पानीपत से school Uniform की आपूर्ति की जाती है. सूत के दाम बढ़ने से कपड़े के दाम बढ़ गए हैं.

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