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New Delhi

गेहूं के बाद चावल के निर्यात पर भारत सरकार के बैन से मची अफरातफरी, दुनिया भर मे 4 दिन मे ही बढ़ी महंगाई

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नई दिल्ली :- भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. गेहूं की बढ़ती कीमतों की वजह से आम- आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. सरकार ने रोक लगाने का फैसला बढ़ती मंहगाई को देखते हुए लिया था. पहले गेहूं और चीनी की समस्या थी और दोनों वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी. इसलिए भारत ने गेहूँ के निर्यात पर रोक थोप दिया और चीनी के निर्यात पर भी नियंत्रण कर लिया. अब सरकार ने दोबारा चावल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है. दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत में 9 सितंबर को चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

सरकार ने इसलिए लिया फैसला

केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने जानकारी देते हुए बताया मौजूदा खरीफ सीजन में धान की बुवाई क्षेत्र में गिरावट के कारण करोड़ों को तादाद में नुकसान झेलना पड़ा है. मानसून की औसत से कम बारिश के कारण चावल के उत्पादन में 1-12 मिलियन टन की गिरावट देखने को मिली है, इसके कारण स्थानीय बाजारों में चावल की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है. साथ ही सरकार ने निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए गैर-बासमती चावल पर 20% का सीमा शुल्क भी लगाया है. हालांकि उसना राइस को इससे बाहर रखा गया है. इसके अलावा टूटे हुए चावल पशुओं के चारे के लिए भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है. इसका उपयोग इथेनॉल में मिश्रण के लिए भी किया जाता है.

सरकार के इस फैसले से मचा विदेशों में हहाकार

भारत चावल उत्पादन करने में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. चावल खाद्यान्न के वैश्विक व्यापार का 40% हिस्सा है. भारत द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, एशिया में व्यापार लगभग ठप हो गया है, क्योंकि भारतीय व्यापारी अब नए समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. नतीजतन, खरीदार वियतनाम, थाईलैंड और म्यांमार जैसे Options की तलाश कर रहे हैं. लेकिन इन देशों के व्यापारियों ने मौके का फायदा उठाकर कीमतों में इजाफा किया है.

अब चावल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण 

यूक्रेन युद्ध के बाद से खाद्यान्न की मांग और आपूर्ति में असंतुलन रहा है. पहले गेहूं और चीनी की समस्या थी और दोनों वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी. हाल ही में भारत ने गेहूँ के निर्यात पर रोक थोप दिया और चीनी के निर्यात पर भी नियंत्रण कर लिया. अब सरकार चावल की बढ़ती कीमतों पर भी नियंत्रण करना चाहती है. भारत दुनिया के 150 से अधिक देशों को चावल का निर्यात करता है. इसलिए इस चावल निर्यात के प्रतिबंध का सीधा असर उन देशों में कीमतों पर पड़ता है. यूरोप और अमेरिका के कई क्षेत्र ऐतिहासिक सूखे से जूझ रहे हैं और यूक्रेन युद्ध का असर भी विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा रहा है.

Jyoti Pandey

मेरा नाम ज्योति पांडेय है. मैं Khabri Express पर बतौर कंटेंट राइटर काम करती हूं. मैं हिंदी पत्रकारिता की 3rd Year दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं. मैंने कंटेंट राइटर का काम विभिन्न वेबसाइट पर किया है, जैसे - हरियाणा प्रेस, नव जगत , ड्रीम न्यूज 24. साथ ही मैने इंडिया न्यूज में इंटर्नशिप भी की है. मुझमें सबसे बड़ी खूबी है, मैं सीखने के लिए हमेशा अग्रसर रहती हूं. मैं अपने काम को लेकर ईमानदार और समयनिष्ठ हूं.

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