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जश हत्याकांड: बालों और खून के नमूनों के डीएनए रिपोर्ट ने किया बड़ा खुलासा, पुलिस ने कही ये बात

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करनाल:- चार साल के मासूम जश की हत्या आरोपित चाची अंजलि ने ही की थी. अब जश के खून के नमूनों व बालों की डीएनए जांच रिपोर्ट से भी पता चला है. मंगलवार को डीएनए रिपोर्ट मिली तो पुलिस के अब तक किए जा रहे दावे सच साबित हो गए. इसके साथ ही पुलिस को अब जश की हत्या को लेकर किसी प्रकार का शक नहीं है , लेकिन आरोपित अंजलि के लिए गठित मनोचिकित्सकों के बोर्ड की अंतिम विश्लेषण रिपोर्ट आनी शेष है.

बोर्ड ने साफ कर दिया है कि इसके लिए अंजलि को उनकी निगरानी में दाखिल करना होगा, जिसके लिए अदालत से स्वीकृति लेनी होगी. पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट आते ही इसके लिए भी कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस अंजलि को ही आरोपित मान चुकी थी, लेकिन डीएनए जांच व मनोरोग विशेषज्ञों की अंतिम विश्लेषण रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही थी.

इनमें मिले थे खून के निशान

बता दें कि पुलिस को जांच के दौरान जब पता चला कि आरोपित चाची अंजलि ने बेड पर मोबाइल चार्जर की तार से गला घोंटकर जश की हत्या की थी, जिसके बाद उसका शव बेड में छिपा दिया था. बाद में शव राजेश के घर की छत पर रख दिया. जांच के तहत पुलिस ने मौके से चदर, तकिये के कवर, बेड, पीठू बैग व चार्जर की तार आदि पर लगे खून के निशान तथा बेड में मिले सिर के बालों को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा था. इसी जांंच रिपोर्ट पर पुलिस ही नहीं घरवाले व अन्य आम लोगों की भी नज़रे बनी हुई थी. वहीं अंजलि किस स्तर के मनोरोग से ग्रसित है, यह पूरा विश्लेषण करने के लिए मनोरोग चिकित्सकों का बोर्ड भी बनाया गया है, जिसकी निगरानी में अंजलि को रखा जाना है. बोर्ड की अंतिम विश्लेषण रिपोर्ट ही पुलिस की ओर से हत्याकांड के पीछे मुख्य वजह मानी जाएगी.

अंजलि की होगी विशेष निगरानी, जेल अधीक्षक को लिखा पत्र

अंजलि द्वारा जश हत्याकांड को अंजाम देने के पीछे अभी तक उसका मनोराेग ही प्रमुख कारण माना जा रहा है. पुलिस के अनुसार वह इसी रोग के चलते दो बार अपने पति की हत्या का प्रयास कर चुकी है तो वहीं खुद भी कई बार उसने आत्महत्या की कोशिश की. मनोरोग के चलते उसे पड़ने वाले गुस्से के दौरे के कईं साक्ष्य मिले हैं तो वहीं चिकित्सकों से लिए जा रहे ईलाज का रिकार्ड भी लिया गया है. ऐसे में आशंका है कि जेल में भी वह कोई गलत कदम उठा सकती है, जिसके लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है. सीआइए इंस्पेक्टर मोहनलाल का कहना है कि इसके लिए जेल अधीक्षक अमित कुमार भादो को पुलिस अधीक्षक गंगा राम पूनिया की ओर से पत्र लिखा गया है.

पुलिस को अब कोई आशंका नहीं : मोहन लाल

सीआइए टू इंचार्ज मोहन लाल का कहना है कि सभी नमूनों की डीएनए रिपोर्ट से सच सामने आगया है कि ये सब जश के ही थे और अंजली ने ही उसकी हत्या की थी. पहले लिए गए नमूनों से ब्लड ग्रुप पहले ही मैच हो गया था और अब डीएनए भी मैच हो जाने के बाद इसमें कोई संशय नहीं रहा. वहीं आरोपित अंजलि की मनोदशा को लेकर मनोचिकित्सकों ने साफ कर दिया है कि उसे अस्पताल में दाखिल कर ही निगरानी में रखा जा सकेगा, इसके लिए अदालत से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

Author Deepika Bhardwaj

नमस्कार मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हूं. मैंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करती हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुंचाती हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

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