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Chandigarh

Special: छोटे भाई का हक़ डकार कर मुँह मोड़ रहा है पंजाब, जाने SYL विवाद का पूरा इतिहास

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चंडीगढ़ :- किसान आंदोलन में साथ साथ रहने वाले खुद को बड़ा भाई बताने वाले पंजाब के बारे में तो आप सभी जानते ही है की कैसे पंजाब वैसे तो हरियाणा को छोटा भाई बताता है, लेकिन सालो से मांग रहे हक़ को अभी तक पंजाब खुद ही डकार रहा है. आज हम आपको बताएंगे की SYL विवाद के बारे में और इसके इतिहास के बारे में तो आइए जाने क्या है SYL विवाद.

44 साल से है SYL विवाद

बता दें कि 1966 में पंजाब से जब हरियाणा अलग हुआ तो तभी उसके साथ ही SYL विवाद भी पैदा हो गया. 10 साल के लंबे विवाद के बाद दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को अंतिम रूप से दिया गया और इसी के साथ सतलुज यमुना नहर बनाने की बात कही गई. इसके बाद पंजाब के किसान फिर सड़क पर उतर आए. इसके बाद साल 1981 में समझौता हुआ और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 8 अप्रैल 1982 को पंजाब के पटियाला जिले के कपूरे गांव में SYL का उद्घाटन किया था. हालांकि इसके बाद भी विवाद सुलझा नहीं था बल्कि यह विवाद और भी बढ़ता गया. 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एसएडी प्रमुख हरचंद सिंह लोंगोवाल से मुलाकात की थी और फिर एक न्यायाधिकरण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

1990 में नहर से जुड़े रहे एक मुख्य इंजीनियर और एक अधीक्षण अभियंता अवतार सिंह को आतंकवादियों ने मार दिया था. नहर के पानी के चलते हरियाणा सरकार ने 1966 में सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी इसके बाद 15 जनवरी 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को 1 साल में एसवाईएल बनाने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 4 जून 2004 पंजाब सरकार ने अपनी याचिका दायर की जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

हरियाणा को हक देने के लिए पंजाब नहीं है राजी

बता दें कि पंजाब ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 बनाकर तमाम जल समझौते रद्द कर दिए. इस तरह से पंजाब ने हरियाणा का पानी देने वाले समझौते को मानने से ही इंकार कर दिया था. पंजाब नहर के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस करने की बात कही इसके लिए एक विधेयक भी विधानसभा में पारित किया गया था, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है और नहर को मिट्टी से भर दिया गया है. ऐसे में संघीय ढांचे की अवधारणा पर चोट पहुंचने की आशंका को देखते हुए राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से रेफरेंस मांगा. 12 साल तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा और 2015 में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति के रेफरेंस पर सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने का अनुरोध किया फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने सुनवाई से दोनों राज्यों के बीच के विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने की बात कही.

पंजाब और हरियाणा के किसान हो सकते हैं आमने सामने

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार हरियाणा के पक्ष में फैसले दिए जाते रहे हैं. 2017 में तो एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मुकदमा भी पंजाब सरकार के खिलाफ हुआ था. जब हरियाणा के पक्ष में आए फैसले के अगले ही दिन पंजाब सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश जारी किए थे कि अदालती आदेश का पालन करना चाहते हैं, लेकिन अपने किसानों को नजरअंदाज नहीं कर सकते. हमारे किसान भूख से मरे और हम सतलुज और व्यास नदी का पानी किसी और को क्यों दे पानी हमारी जरूरत है. पंजाब के इस रूख के कारण वर्षों से इस मामले का समाधान नहीं निकल पा रहा है. ऐसे में अब फिर एक बार हरियाणा के कृषि मंत्री ने मामला उठाकर दोबारा से जिंदा कर दिया और अगर यह मामला तूल पकड़ता है तो दोनों राज्यों के किसान आपस में बट सकते हैं.

Sunny Singh

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सनी सिंह है. मैं खबरी एक्सप्रेस वेबसाइट पर एडमिन टीम से हूँ. मैंने मास्स कम्युनिकेशन से MBA और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म का कोर्स किया हुआ है. मैंने ABP न्यूज़ में भी बतौर कंटेंट राइटर काम किया है. फ़िलहाल मैं खबरी एक्सप्रेस पर आपके लिए सभी स्पेशल केटेगरी की पोस्ट लिखता हूँ. आप मेरी पोस्ट को ऐसे ही प्यार देते रहे. धन्यवाद

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