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Chandigarh

जज्बे को सलाम: 11 साल बैड पर रही तो लोग कहते थे इसे जहर दे दो, अब बनी पहली व्हीलचेयर फूड डिलीवरी वूमेन

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चंडीगढ़ :- मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. इन्हीं शब्दों को बिहार के समस्तीपुर की 33 वर्षीय विद्या नेसच कर दिखाया है. विद्या के जीने के जज्बे और जुनून ने उन्हें चंडीगढ़ की पहली व्हीलचेयर फूड डिलीवरी वूमेन बनाया है. विद्या बात करते हुए कहती हैं कि गांव में साइकिल चलाते हुए वर्ष 2007 में बैलेंस बिगड़ने की वजह से वह पुल के नीचे गिर गई. 

रिश्तेदारों ने घरवालों से कहा इसे जहर दे दो

होश आया तो मैं Hospital में थी, डाक्टरों ने बताया कि अब मैं कभी भी सीधे खड़ी नहीं हो सकती. मां-बाप ने मेरे इलाज के लिए खूब दौड़भाग की, लेकिन किसी डाक्टर ने उन्हें यह विश्वास नहीं दिया कि मैं फिर से चल पाऊँगी. वक्त के साथ उनकी हिम्मत भी कम होने लगी और मेरे लिए मेरा बिस्तर ही मेरी दुनिया बन गई. विद्या ने बताया कि हादसे के बाद वह 11 वर्ष तक बिस्तर पर रहीं. जो लोग तथा रिश्तेदार मेरा हाल चाल जानने आते, वह मेरे मुंह पर ही मां -बाप से कह देते थे कि इसे जहर दे दो, कम से कम इस तकलीफ से तो पीछा छूटेगा. ऐसे यह पूरी उम्र कैसे काटेगी. सोए-सोए मुझे पीठ पर घाव हो गए, मैं खुद भगवान से कुछ इसी तरह की प्रार्थना करती. 

रिहैब सेंटर में जगी फिर से जीने की उम्मीद 

विद्या ने बताया कि उनके किसी जानकार ने चंडीगढ़ Spinal Rehab Center के बारे में बताया. सेंटर ने मेरे परिवार से संपर्क किया, वर्ष 2017 में मैं चंडीगढ़ आई. सेंटर की CEO निक्की पवन कौर ने पहले मेरे बेडसोल का Operation करवाया और फिर मुझे इस हालत के साथ जीने के लिए रिहैब किया. सेंटर में उपस्थित अन्य साथियों को देखकर मेरे अंदर भी जीवन जीने की उम्मीद जागने लगी. विद्या का कहना है कि रिहैब सेंटर में उन्होंने स्पो‌र्ट्स ज्वाइन किया और फिर बास्केट बाल, स्विमिंग, लान टेनिस और टेबल टेनिस खेलना शुरू किया. मैंने स्कूबा डाइविंग और फैशन शो में भाग लिया. इसके अलावा मैं अपने सेंटर में भी सभी को योग सिखाती हूं. टेबल टेनिस की तो मैं National खिलाड़ी हूं, लेकिन कोचिंग की कोई व्यवस्था नहीं होने कारण मैं इस खेल में आगे नहीं बढ़ पा रहीं.

नौकरी की बात सुनकर मां बाप हुए बेहद खुश 

मैंने व्हीलचेयर ओपन नेशनल टेबल टेनिस टूर्नामेंट में दो गोल्ड मेडल प्राप्त किये हैं. विद्या बताती हैं कि जैसे ही मैंने नौकरी शुरू के लिए अपने माता पिता को बताई तो वे खुशी से फुले नहीं समाये. वह खुश हैं कि आज मैं पैरों पर खड़ी हूँ. जब मैं अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी पर डिलीवरी करने जाती हूं तो सब लोग मुझे प्रोत्साहित करते हैं, कई लोग तो रुक कर मुझसे बात करना चाहते हैं, लेकिन मै काम के चलते आर्डर उनसे ज्यादा बात नहीं कर पाती हूं.

 हमेशा अपनी हिम्मत बनाए रखें 

मेरा आधा शरीर Paralyzed है इसलिए मुझे चोट लगने का काफी भय बना रहता है, फिर भी मुझे इस नौकरी से कोई परेशानी नहीं है. दिव्यांगों की अपनी Problems हैं, तो स्वस्थ लोगों की अपनी समस्या है. आप उन परेशानियों से निकलने का प्रयास करें, अपने लिए ईश्वर से विनती करें. हमेशा आगे बढ़े ताकि बाद में यह ना सोचना पड़े कि उस वक़्त हिम्मत क्यों नहीं की.

Author Deepika Bhardwaj

नमस्कार मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. मैं 2022 से खबरी एक्सप्रेस पर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हूं. मैंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री की है. मेरा उद्देश्य है कि हरियाणा की प्रत्येक न्यूज़ आप लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच जाए. मैं हमेशा प्रयास करती हूं कि खबर को सरल शब्दों में लिखूँ ताकि पाठकों को इसे समझने में कोई भी परेशानी न हो और उन्हें पूरी जानकारी प्राप्त हो. विशेषकर मैं जॉब से संबंधित खबरें आप लोगों तक पहुंचाती हूँ जिससे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं.

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