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Chandigarh

Independent Day Special: जानिए महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य, जिन्हे बहुत कम लोग जानते हैं

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चंडीगढ़ :- 200 वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहने के बाद भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ था. इसलिए इस दिन को बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. देश को आजाद करवाने के लिए बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए थे. इस दिन इन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती हैं.

March 2021 से PM ने शुरू किया आजादी का अमृत महोत्सव 

PM नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ उत्सव मनाने का एलान किया, जिसकी शुरुआत March 2021 से की गई. बता दे कि भारत को स्वतंत्र कराने में सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का अहम योगदान रहा है. इनमें से सबसे अधिक योगदान सरदार भगत सिंह का रहा है.

शहीद ए आजम भगत सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 

76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भगत सिंह से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जान लेते है. 27 सितंबर 1907 को पाकिस्तान के लायलपुर जिले में जन्मे भगत सिंह का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जिसकी स्वतंत्रता संग्राम मे पहले से ही भागीदारी रही है. भगत सिंह के पिता किशन सिंह और माता विद्यावती देवी थी. भगत सिंह की शुरुआती स्कूली शिक्षा दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल में हुई, उसके बाद उन्होंने आगे की शिक्षा लाहौर के National College से पूरी की.

गांधी जी की नीतियों से थे काफी प्रभावित 

महान क्रांतिकारी भगत सिंह गांधी जी की नीतियों से काफी प्रभावित थे. भगत सिंह ने अपने साथियो के साथ मिलकर अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी में सरकारी खजाने को ले जाती 8 डाउंस रेलगाड़ी को लूटा, इस लूट के आरोप में उसके साथी अशफाक उल्ला खां, रोशनलाल, राजेंद्र लहिड़ी को फांसी की सजा दी गई. March 1926 में भगत सिंह ने समाजवादी संगठन ‘भारत नौजवान सभा’ का गठन किया जिसके सदस्य राजपाल, छब्बल दास, राजगुरु और सुखदेव थे.

23 मार्च 1931 को हुई फांसी 

1928 में उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का गठन किया. 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद और राजगुरु के साथ मिलकर लाहौर में सांडर्स की हत्या कर दी थी परन्तु उनका लक्ष्य स्कॉट को मारने का था. इस हत्या की सजा के रूप में 23 March 1931 को तीनों को फांसी दे दी गई. तब से लेकर प्रत्येक वर्ष 23 मार्च को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

Author Shweta Devi

मेरा नाम श्वेता है. मैं हरियाणा के भिवानी जिले की निवासी हूं. मैंने D.Ed और स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर ली है. वर्तमान में मै Khabri Express पर बतौर लेखक के रूप में कार्य कर रही हूं. मै सरकार के द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीम, एजुकेशन और लाइफ स्टाइल से जुड़े विभिन्न कंटेंट जितनी जल्द हो सके पाठको तक पहुंचाने की कोशिश करती हूँ.

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