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Chandigarh

CAG Report: हरियाणा रोडवेज का घाटा और ब्रेक डाउन बढ़े, बढ़ते घाटे से लगातार कम हो रहा है बेडा

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चंडीगढ़ :- हरियाणा परिवहन विभाग की ढुलमुल कार्यप्रणाली की पोल भारत में नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानी CAG ने खोल डाली है. 2015 से 30 March 2020 को समाप्त हुए वित्त वर्ष की अवधि का कैग ने December 2020 से August 2021 के बीच ऑडिट किया Assembly on Monday में सदन पटल पर रखी रिपोर्ट के अनुसार Roadways का घाटा, ब्रेक डाउन बड़े और बसे कम होती गई. साधारण CNG बसे और E-Ticketing बस खरीदने के लिए आई राशि को अन्य जगह खर्च किया गया. HIC गुरुग्राम में तैयार बसे देरी से उठने पर 12 करोड़ रुपए की चपत लगी. 642 तैयार फैब्रिकेटिड बसों में से 529 को 7 दिनों के भीतर डिपो को उठाना था, लेकिन दस से 333 दिनों की देरी पर उठाया.

22 करोड़ रुपए अन्य उद्देश्यों के लिए खर्च कर दिए

2008 से 2014 के बीच Jawaharlal Nehru शहरी नवीकरण Machine की योजना के अंतर्गत 32 करोड़ रुपए बस खरीदने, और ई-टिकटिंग मशीने खरीदने के लिए आए, लेकिन May 2019-20 में इसमें से 22 करोड़ रुपए अन्य उद्देश्यों के लिए खर्च कर दिए. बसों की औसत संख्या 2015-16 में 4210 थी. जो 2019- 20 में घटाकर 3118 रह गई. इसी दौरान 8 साल से अधिक पुरानी बसों का बेड़ा 82 से बढ़कर 582 हो गया. बसों का बेड़ा घटने के कारण ब्रेक डाउन की संख्या 4118 से बढ़कर 4841 पहुंच गई. 775 निर्धारित किलोमीटर तय न करने पर 86 करोड़ की चपत लगी.

1613 बसों को अनुपयोग घोषित कर दिया गया

बस चेसिज की खरीद और निर्माण लागत योजना के 700 करोड़ रुपए में से 542 करोड़ रुपए विभाग को सरेंडर करने पड़े. 2015-20 के बीच 995 बस से चलाने के लक्ष्य के विपरीत 450 साधारण चेसिज, 150 नीली और 18 सुपर लग्जरी बस ही खरीदी गई. इसी दौरान 1613 बसों को अनुपयोग घोषित कर दिया गया. जिससे बेड़े में कमी आई. Low Floor बसों को समय से पहले अयोग्य घोषित करने पर 3 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ. Workshop में बसों को लंबे समय तक रोकने के कारण सवा चार करोड़ रुपए का घाटा हुआ. परिवहन विभाग की वास्तविक आय 2015-20 मे कम होकर 1105 करोड रह गई, यह पहले 1254 करोड़ थी.

2879 वाहन मालिकों ने जमा नहीं किया जुर्माना

आठ छत्रिय परिवहन प्राधिकरणों में 2879 वाहनों के मालिकों ने April 2017 से March 2020 के बीच लगभग 7 करोड का जुर्माना जमा नहीं किया. 132 वाहनों पर मोटर वाहन कर मूल पंजीकरण समय Ex Showroom की कीमतों पर नहीं लगाया गया. जिससे 56 लाख रुपए की कम वसूली हुई. 753 वाहन मालिकों ने फिटनेस प्रमाण पत्र (Certificate) का नवीनीकरण नहीं करवाया. जिससे लगभग 4 करोड़ रुपए की वसूली नहीं हुई.

Sunny Singh

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सनी सिंह है. मैं खबरी एक्सप्रेस वेबसाइट पर एडमिन टीम से हूँ. मैंने मास्स कम्युनिकेशन से MBA और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म का कोर्स किया हुआ है. मैंने ABP न्यूज़ में भी बतौर कंटेंट राइटर काम किया है. फ़िलहाल मैं खबरी एक्सप्रेस पर आपके लिए सभी स्पेशल केटेगरी की पोस्ट लिखता हूँ. आप मेरी पोस्ट को ऐसे ही प्यार देते रहे. धन्यवाद

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