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हिसार के राजीव गांधी Thermal Power Plant में पुलिस और ग्रामीणों में झड़प, एक ग्रामीण की मौत से हालात तनावपूर्ण

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हिसार :- हिसार के खेदड़ पावर प्लांट (Power Plant) में राख की मांग को लेकर एक बार फिर से पुलिस में प्रदर्शनकारी ग्रामीण आमने-सामने आ गए हैं. ग्रामीणों ने शुक्रवार को पंचायत कर रेलवे ट्रैक पर बैठने का निर्णय किया था. प्रशासन को जिस समय इसका पता चला वैसे ही ग्रामीणों को रोकने के लिए बैरिकेड लगा दिए गए और वाटर कैनन का इंतजाम भी किया. इतना ही नहीं इसके साथ-साथ 6 डीएसपी (DSP) सहित एक एसएसपी (SSP) ने भी मोर्चा संभाला हुआ था.

एक की मौत व सात घायल

प्रदर्शनकारी ग्रामीण मार्च निकालते हुए आगे बढ़ रहे थे, मगर इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पर ट्रक चला दिया और इस कारण भगदड़ मच गई. पुलिस को वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े. बैरिकैड पर ट्रैक्टर चलाने के परिणामस्वरूप कुछ ग्रामीण भी इसकी चपेट में आए है. इसमें गांव खेदड़ के 56 वर्षीय धर्मपाल पुत्र दिदारा की मृत्यु हो गई और इसके साथ साथ 7 ग्रामवासी व पुलिसकर्मी भी घायल हो गए है.

गांव में बनी हुई है तनावपूर्ण स्थिति

दो घायल पुलिसकर्मियों को नागरिक अस्पताल हिसार में लाया गया है जबकि अन्य किसान बरवाड़ा के सरकारी अस्पताल में दाखिल हुए हैं. हंगामे के बाद अब भी स्थिति तनावपूर्ण ही बनी हुई है. एसपी लोकेंद्र सिंह और डीसी डॉ प्रियंका सोनी ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा ले लिया है. वहीं धरने पर बैठे लोगों ने आगामी रणनीति बनाने के लिए पंचायत करनी शुरू कर दी है.

पंचायती तौर पर किया गया था बहिष्कार

वहीं इससे पहले सुबह हुई पंचायत में बिजली मंत्री रणजीत सिंह, मंत्री अनूप धानक, जजपा विधायक जोगीराम सिहाग का पंचायती तौर पर बहिष्कार कर दिया गया था. प्रदेश स्तरीय किसान नेताओं के पहुंचने के बाद खदेड़ थर्मल प्लांट को जाने वाले रेलवे ट्रैक पर किसान पड़ाव डालने और कोयले की आपूर्ति बाधित करने का फैसला किया गया था.

कोयले की आपूर्ति रोकना चाहते थे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारी ग्रामीण किसान नेताओं के संपर्क में रहे थे. ग्रामीणों ने पंचायत करके फैसला ले लिया था कि सरकार शांतिपूर्ण धरने से मानने वाली नहीं है. इसके लिए ठोस कदम उठाने ही होंगे. इसके बाद कोयले की आपूर्ति रोकने के लिए खेदड़ प्लांट तक आने वाले रेलवे ट्रैक पर ग्रामीणों ने धरना देने का फैसला ले लिया. अगर ऐसा हो जाता तो कोयले की आपूर्ति प्लांट तक रुक जाती और 600-600 मेगावाट के दो सयंत्र बंद पड़ जाते. जिसको लेकर प्रशासन पहले ही अलर्ट हो गया था.

यह रहा है विवाद का कारण

खेदड़ थर्मल प्लांट से राख निकलती रहती है. ग्रामीणों का दावा है कि गांव की गौशाला पहले राख उठाया करती थी लेकिन बाद में खेदड़ थर्मल प्लांट ने फैसला किया कि राख अब फ्री में नहीं दी जाएगी. इसको लेकर ही किसानों और प्रबंधन में टकराव पैदा हो गया है. गौशाला संचालन करने वाले ग्रामीणों की कमेटी का कहना है कि थर्मल की राख को बेचकर ही वह गौशाला का संचालन करते थे लेकिन अब ऐसे में गायों को पालने का संकट खड़ा हो गया है.

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